भगवान श्री राम का जन्मोत्सव | अयोध्या में श्री राम जन्म क्यों हुआ ?

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भगवान श्री राम के जन्मोत्सव | एक छोटी सी जानकारी

भगवान श्री राम का जन्मोत्सव | अयोध्या में श्री राम जन्म क्यों हुआ ?



हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं। मैं भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के विषय में आपको जानकारी देने की कोशिश कर रहा हूं। त्रेता युग में जब धरती पर राक्षसों के राजा रावण के अत्याचारों से तीनों लोग तथा उनमें रहने वाले सभी प्राणी पृथ्वी, ऋषि, मुनि, देवता और गंधर्व सब दुखी हो चुके थे। रावण के अत्याचारों का विरोध करने का साहस इनमें से किसी का भी नहीं हो रहा था। क्योंकि जो उसका विरोध करता, उसे वह पापी जान से मार देता था।

दुखी होकर सभी प्राणी, पृथ्वी, ऋषि, मुनि, देवता और गन्धर्व भगवान श्री हरी विष्णु के पास गए। सभी ने भगवान श्री हरी विष्णु का वंदन किया और प्रणाम किया। और उनसे अपनी रक्षा की प्रार्थना की। सबसे पहले ब्रह्मा जी ने भगवान श्री हरि विष्णु से कहा ये सच्चिदानंद के सृष्टिपालक, पापी रावण के अत्याचारों से पीड़ित होकर ये पृथ्वी, ऋषि, मुनि, देवता, गंधर्व, सब आपकी शरण में आये हैं। इनकी रक्षा कीजिए। भगवान इनकी रक्षा कीजिए। तब देवराज इन्द्र ने भगवान श्रीहरि से कहा हे प्रभु। पृथ्वी पर धर्म और सत्य का नाश हो रहा है। पाप की शक्तियां बढ़ रही हैं। राक्षसों का राजा रावण अहंकार के मद में चूर होकर तीनों लोकों को अपने पाप तले रौंदने को तैयार है। देव, दानव, मनुष्य कोई भी उसके सामने आने की हिम्मत नहीं करता।

माता पृथ्वी ने भी भगवान श्री हरि विष्णु से कहा कि हे प्रभु। आपकी सृष्टि का भार धारण करना मेरा धर्म है। परन्तु जब धर्म की जगह अधर्म का राज होता है, तो अधर्म से अनाचार, अनाचार से भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार से अत्याचार की ज्वाला भड़क उठती है। जब अत्याचार इतने बढ़ जाते हैं, तो देखिए पाप की ज्वाला से मेरा शरीर जलने लगता है। प्रभु मेरी रक्षा कीजिए।

फिर देवराज इंद्र ने कहा हे करुणा निधान। पृथ्वी त्राही त्राही कर रही है। जब वह अभिमानी चलता है, तो ऐसा प्रतीत होता है की मानो वह धरती को अपने पैरों तले कुचल रहा हो। असुरों के आतंक से धर्मशील जनता चीत्कार कर रही है। उसके सैनिक लोगों को त्रास दे रहे हैं। राक्षस साधु जनों का खून पी रहे हैं। प्रभु, आज अबलाओं की लाज और मानव की मानवता बचाने वाला कोई नहीं रहा। आज वो अवस्था आ गयी है की यदि कोई धर्म और सत्य के रास्ते पर चलने की कोशिश करे तो वह जीवित नहीं रह सकता। आज हर प्राणी, पाप और भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलने को विवश किया जा रहा है।

तब भगवान भोलेनाथ भी प्रकट हुए और उन्होंने भगवान श्रीहरि से कहा हे! सच्चिदानंद। जब ऐसी अवस्था आ जाए तो सत्य की रक्षा के लिए किसी महान शक्ति का अवतार लेना आवश्यक हो जाता है। हे सर्वेश्वर। आपने जो कर्म का विधान बनाया है, उसके अनुसार जो भी कर्म, करेगा, परिश्रम, करेगा, तपस्या करेगा, उसे शक्तियाँ अवश्य प्राप्त होंगी। हे प्रभु। उसी विधान को निभाना आपका कर्तव्य है।

तब देव गुरु वृहस्पति ने भगवान श्री हरी से कहा हे प्रभु। धरती पर। जब भी कोई अत्याचारी प्राणी मात्र को अपने चरणों पर झुकने पर मजबूर कर देता है, तो 1 सच्चा प्राणी उसके सामने झुकने से इनकार कर देता है। क्योंकि उसे विश्वास होता है की ऊपर कोई शक्ति है, जो उसके साथ न्याय करेगी। उसकी रक्षा करेगी। जिस दिन यह विश्वास टूट जाएगा कि अंत में सच्चाई की जीत होती है, उस दिन कोई धर्म के रास्ते पर नहीं चलेगा।

समाज बिखर जाएगा। धरती, सूर्य, चंद्रमा, अपना, अपना रास्ता बदल देंगे। सृष्टि का सारा क्रम अस्त व्यस्त हो जायेगा। इस पर भगवान शिव ने कहा हे प्रभु। देव गुरु वृहस्पति ठीक कह रहे हैं। यही वह समय है जब ईश्वर का अवतार लेना आवश्यक हो जाता है।

तब भगवान श्री हरी विष्णु ने देवादि देव भगवान शिव शंकर से कहा की हे त्रिपुरारी। पापी के पाप में ही उसके नाश का बीज छुपा रहता है। जो रावण यह समझता है की उससे बढ़कर कोई शक्ति नहीं रही, तो उसका नाश भी उसी अहंकार में छुपा हुआ है। उस अहंकार के कारण उसने वरदान मांगा था कि देव, दानव, नाग, किन्नर, गंधर्व किसी के हाथों से वह मारा नहीं जाएगा।

जिस मानव को वह कीड़े मकोड़ों की तरह कुछ समझता है, उसी सामान्य मानव के रूप में मैं अवतार लेकर उसका मान भंग करूंगा। फिर भगवान श्री हरी ने कहा हे पृथ्वी। समस्त जगत के प्राणियों। देवताओं, ऋषि, मुनियों, गंधर्वों, ग्रहों और नक्षत्रों। अब आप निश्चिंत हो जाइए। क्योंकि हम अपनी समस्त कलाओं सहित अयोध्या, नरेश, राजा, दशरथ के घर उनके पुत्र के रूप में पृथ्वी पर जन्म लेंगे और असुरों के अत्याचारों से पृथ्वी की रक्षा करेंगे। ताकि धरती पर जहां भी लोग सत्य और धर्म का साथ दें, वहाँ उन्हें एक विश्वास हो सके कि अंत में जीत सच्चाई की ही होती है। और इस सृष्टि में एक ही जय घोष गूंजेगा। वह है सत्यमेव जयते।

इस प्रकार चैत्र शुक्ल नवमी के दिन त्रेता युग में रघुकुल, शिरोमणि, अयोध्या नगरी के महाराज, दशरथ एवं महारानी कौशल्या के घर भगवान श्री हरि विष्णु जी ने उनके पुत्र श्री राम के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया। भगवान श्री राम के जन्मोत्सव को देखकर देवलोक भी अयोध्या के सामने फीका लग रहा था। सभी देवता, प्राणी, ऋषि, मुनि, गन्धर्व, किन्नर, चारण, भूमाता, ग्रह और नक्षत्र इत्यादि जन्मोत्सव में शामिल होकर आनंद उठा रहे थे।

तो यह थी भगवान श्री राम और उनके इस धरा भूमि पर जन्म लेने के विषय में एक छोटी सी जानकारी। हम आशा करते हैं की आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी।

धन्यवाद।


FAQ


भगवान श्री राम का जन्मोत्सव क्या है?

भगवान श्री राम का जन्मोत्सव उनके जन्म की पर्व स्तिति है, जिसे हम भगवान की अवतारण पर्व के रूप में मानते हैं।

भगवान श्री राम के जन्म की तारीख क्या है?

भगवान श्री राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ था, जिसे राम नवमी भी कहा जाता है, और इसे विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है।

त्रेता युग में भगवान श्री राम का अवतार लेना क्यों था?

त्रेता युग में भगवान श्री राम ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया था।

रावण के अत्याचारों से कैसे बचाया धरती को भगवान श्री राम ने?

भगवान श्री राम ने अपने धर्मपरायण जीवन से रावण के अत्याचारों से बचा धरती को, जिससे धर्म और सत्य की जीत हुई।

माता पृथ्वी ने क्यों की भगवान श्री हरि से प्रार्थना?

माता पृथ्वी ने भगवान श्री हरि से प्रार्थना की ताकि वह धरती को अधर्म से मुक्त करें और धर्म की स्थापना करें।

भगवान श्री राम के अवतार के कौन-कौन से लक्षण थे?

भगवान श्री राम के अवतार के कई लक्षण थे, जैसे कि चार धर्मों का पालन, धरती के रक्षण, और अधर्म का नाश करना।

भगवान श्री हरि ने देवराज इंद्र को क्या कहा?

भगवान श्री हरि ने देवराज इंद्र को दुनियाभर के प्राणियों की रक्षा के लिए उनकी मदद का आदान-प्रदान किया।

इस जन्मोत्सव का महत्व क्या है?

इस जन्मोत्सव का महत्व है क्योंकि इसमें भगवान श्री राम के जन्म की अद्भुतता और धार्मिक महत्वपूर्णता है।

भगवान श्री राम का क्या संदेश है?

भगवान श्री राम का संदेश है धर्म, सत्य, और न्याय की प्रमोट करना, और अधर्म का नाश करना।

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