ज्ञानवापी मस्जिद: इसका इतिहास, महत्व और रहस्य

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ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर क्या क्या मिला?

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 दोस्तों यह हिंदुओं का भाईचारा और सहनशीलता ही है कि एक ऐसा देश जहां पर 100 करोड़ से अधिक हिंदू रहते हैं वहां पर एक मंदिर पर खड़ी मस्जिद है जिसकी दीवारें चीख रही हैं कि वह मंदिर है और फिर भी हिंदू बिना किसी दंगे फसाद के कोर्ट में जाकर इस विवाद का हल शांति से निकालना चाहते हैं जो चीज आंखों के सामने है उसके लिए भी कोर्ट में जाकर प्रूव करना पड़ रहा है ज्ञानवापी नाम स्वयं में ही और इस मस्जिद की पश्चिमी दीवार को देखकर एक बच्चा भी बता सकता है कि एक मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद खड़ी की गई है लेकिन फिर भी कोर्ट के कहने पर एएसआई की टीम ने सर्वे किया और जब एसआई की भी रिपोर्ट आ गई।

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 और उसमें भी प्रूव हो गया कि मस्जिद मंदिर के ऊपर ही बनाई गई है तो आज ऐसे अनपढ़ों की कमी नहीं है जो इस साइंटिफिक रिसर्च को मानने से मना कर देते हैं 

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नमस्ते दोस्तों आप सभी का स्वागत है दोस्तों अभी हाल में ही ज्ञानवापी पर एएसआई की रिपोर्ट आ गई है।

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 और इस एपिसोड में हम उस रिपोर्ट की डिटेल एनालिसिस आपके सामने रखने वाले हैं जिससे आपको पता चले कि वो क्या बिंदु है वो क्या सबूत है जिससे आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया इस कंक्लूजन पर पहुंच है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। 

साथ में इस रिपोर्ट के अलावा और भी ढेर सारे साक्ष को हम आपके सामने रखेंगे और ज्ञानवापी मस्जिद के इतिहास को भी डिस्कस करेंगे तो दोस्तों बिना किसी विलंभ के आज के विश्लेषण को प्रारंभ करते हैं। 


ज्ञानवापी मंदिर किसने और कब तोड़ा?



दोस्तों वैसे तो आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 800 पन्नों की एक रिपोर्ट को कोर्ट में सबमिट किया था ज्ञानवापी के केस पर लेकिन जो अभी हाल में हमारे पास पब्लिक डोमेन में एक रिपोर्ट आई है उसमें 8-10 पन्ने ही हैं और आज हम ये जो पब्लिक डोमेन में आई हुई रिपोर्ट है जिसको सार्वजनिक किया गया है इसकी बारीकियों को समझने वाले हैं साथ में जैसे-जैसे और भी इंफॉर्मेशन पब्लिक डोमेन में आएगी हम अपने चैनल के माध्यम से आप तक पहुंचाते रहेंगे अब साथियों सबसे पहला सवाल ये उठता है कि जो ज्ञानवापी मस्जिद की जगह पर मंदिर था उसका अस्तित्व कब तक था और किसने उसको तोड़ा और और कब तोड़ा।

 तो साथियों रिपोर्ट के 18वें पॉइंट में एएसआई ने साफ-साफ स्पष्ट किया है कि उन्हें मस्जिद के अंदर एक लूज स्टोन पर इंस्क्राइनॉक्स जिसमें साफ-साफ लिखा है की मस्जिद का निर्माण हजरत आलमगीर यानी मुगल शासक औरंगजेब ने अपने शासनकाल में 20 में साल में यानी की 1676 ईस्वी में किया था और बाद में 1792 ईस्वी में मंदिर का जो कोर्टयार्ड होता है उसका रिकंस्ट्रक्शन पुनर्निर्माण कराया गया था अब साथियों यहां पर एक ध्यान देने वाली बात ये है कि एएसआई ने ये भी कंफर्म किया है कि जब उन्होंने 1965 और 1966 में इस मस्जिद का सर्वे किया था तभी इस इंस्क्राइनॉक्स को रिकॉर्ड कर लिया था क्योंकि जब अभी सर्वे किया गया  तो पाया क्या की उनमें छेड़छाड़ की गई है जो बातें लिखी हुई थी मस्जिद निर्माण के विषय में वह खुर्ची गई है अब यहां समय के साथ खुराच गई है या किसी ने जानबूझकर खुर्चा है यह तो महादेव ही जानते हैं लेकिन उन लाइनों का खर्चा हुआ मिलना संशय उत्पन्न करता है यानी कि कोई सबूत मिटाने का प्रयास कर रहा है। तो दोस्तों यह तो पता चल गया कि औरंगजेब के शासनकाल में मस्जिद का निर्माण हुआ यानी की मंदिर को तोड़ा गया अब औरंगजेब ने ही तोड़ा है तो इसका प्रमाण हमें कैसे मिलेगा तो इसका भी जवाब एएसआई ने अपनी इस रिपोर्ट के 20वें पॉइंट में दिया है वहां पर उन्होंने बताया है कि औरंगजेब की जीवनी मासरे आलम गिरी में ये लिखा गया है कि औरंगजेब ने अपने गवर्नर्स को ये आदेश दिया था कि अपने-अपने क्षेत्र में उन मंदिरों को ध्वस्त कर दिया जाए जहां पर काफिरों को शिक्षा दी जाती थी और इसी किताब के अनुसार 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब के ही आदेश पर काशी विश्वनाथ के मंदिर को भी तोड़ा गया था अब साथियों यहां पर सबूतों को मिटाने के लाख प्रयास भले किए जाए लेकिन एक-एक करके बहुत ढेर सारे बूत आर्कियोलॉजिस्ट को मिलते जा रहे हैं जिसमें से सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट सबूत है महादेव जी के नाम का मिलना।


ज्ञानवापी के अभिलेखों में महादेव का नाम


साथियों अगर आप इस रिपोर्ट के 17वें पॉइंट को बहुत डिटेल में पढ़ेंगे तो वहां पर एएसआई को हिंदू मंदिर होने के कई साक्ष्य मिले हैं उन्होंने वहां पर बताया है कि 34 ऐसे अभिलेख मिले हैं जो कि देवनागरी ग्रंथ तेलुगु और कन्नडा भाषा में लिपिबद्ध हैं और इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि इन अभिलेखों में महादेव जी के अन्य नाम जैसे जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर यह सभी नाम भी देखने को मिलते हैं साथ में इन अभिलेखों में एक हमें मुक्ति मंडप नाम बार-बार मिलता है और आपको पता हुआ कि मंडप मंदिर का एक मुख्य भाग होता है अगर आपको मंदिरों के अलग-अलग भागों के बारे में जानना है कि मंदिर की वास्तुकला कैसे निर्धारित होती थी और कैसे बनाए जाते थे मंदिर तो हमारी एक ब्लॉग आर्टिकल भी है मंदिर की वास्तुकला पर जहां पर हमने उत्तर भारत के मंदिरों और दक्षिण भारत के मंदिरों को कंपेयर करते हुए हर एक भाग के विषय में आपको बहुत अच्छे से समझाया है। 


ज्ञानवापी साहन में भी मंदिर की सामग्री का प्रयोग

  अब साथियों अभिलेखों पर केवल हिंदू भगवानों के नाम ही नहीं मिले हैं बल्कि जब आगे और भी सर्वे किया गया तो यह पाया गया कि मस्जिद का निर्माण जो पुराना मंदिर तोड़ा गया था उसी के पार्ट से किया गया है इसके विषय में रिपोर्ट के 16वें पॉइंट में बताया गया है जहां पर जब पिलर्स की साइंटिफिक स्टडी हुई तो यह पाया गया कि ये पिलर्स पुराने ही मंदिर के हिस्सा थे। दोस्तों जो हमारे मंदिर के स्तंभ होते हैं उन परे बहुत सी ऐसी आकृति होती है जो हिंदू दर्शनों पर आधारित है जैसे व्याल की आकृति हो गई। कमल की आकृति हो गई बहुत सी चीजें होती हैं घंटे की आकृति हो गई। उसको तोड़ करके जब मस्जिद में पुनः प्रयोग किया गया तो उन आकृतियों को बिगाड़ कर फिर वहां पर इस्लामिक फ्लोरल आर्ट्स को बनाया गया यानी कि हिंदू स्तंभों को मिटाकर उस पर नई आकृति इस्लामिक आकृति बनाकर इस मस्जिद को खड़ा किया गया साथियों आप मंदिर में जितनी भी आकृति देखते हैं जो भी आर्किटेक्चर देखते हैं उनका आधार हिंदू दर्शन ही है और जैसे एक देवता की प्रतिमा पूजनीय होती है वैसे पूरा का पूरा मंदिर भी पूजनीय होता है क्योंकि मंदिर को देवता का शरीर माना गया है जैसे हमारे शरीर में आत्मा रहती है वैसे मंदिर के अंदर मूर्ति रूपी आत्मा निवास करती है तो हमारे प्राचीन शिल्पकार बहुत दार्शनिक होते थे इसी कारण से उन्होंने सनातन धर्म के मूल्यों सनातन धर्म के दर्शनों को अपने प्रतिभा से मंदिर का आकार दे दिया अगर आप मंदिर की वास्तुकला यानी कि आर्किटेक्चर के पीछे के प्रति चिन्ह को समझना चाहते हैं तो आपको हिंदू दर्शनों को जरूर पढ़ना चाहिए कि क्यों शिव जी को शिवलिंग में दिखाते हैं या अर्धनारीश्वर रूप में दिखाते हैं क्यों हम मंदिर में जाकर परिक्रमा करते हैं इन सभी चीजों का आंसर हमें हिंदू दर्शनों में मिलता है।


 हिंदू दर्शनों को मैं अपने शिक्षण मैप पर विधिवत पढ़ा रहा हूं वहां पर एक-एक संस्कृत सूत्र की सरल और वैज्ञानिक स्तर पर व्याख्या मैं कर रहा हूं तो आप शिक्षण मैप पर इन दर्शनों को सांख्य योग न्याय वैशेषिक मीमांसा और वेदांत को पढ़ सकते हैं साथ में शिक्षण मैप पर बेंगलौर के पेजावर मठ से 12 वर्षों तक गुरुकुल पद्धति से पढ़े हुए संस्तान के उत्तर को हम देते हैं साथियों आप हाइपर क्वेस्ट को इतना प्यार और सपोर्ट देते हैं इसके लिए हम आपको 15 पर का एक्स्ट्रा डिस्काउंट भी उपलब्ध कराएंगे जिसके लिए आप h परर 15 कूपन कोड को अप्लाई कर सकते हैं साथियों मैंने ऐप की लिंक नीचे कमेंट सेक्शन और डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दी है एक बार अवश्य जुड़कर देखें साथियों आइए अब रिपोर्ट में आगे बढ़ते [संगीत] हैं 


ज्ञानवापी मस्जिद बनाने के लिए मंदिर के किन भागों को तोड़ा गया?

अब दोस्तों जिस हिंदू मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई वह मंदिर कैसा था ? कितना भव्य था? और उसकी आर्किटेक्चर के कैसी थी? उसके विषय में आपको रिपोर्ट में आठवें पॉइंट में मिलेगा तो चलिए जानते हैं कि वो हिंदू मंदिर कितना बड़ा था उसके क्या-क्या भाग थे और कौन-कौन से अंग थे साथियों रिपोर्ट के आठवें पॉइंट में बताया गया है कि इस मंदिर के बीच में एक बहुत बड़ा सा कक्ष था। और इस कक्ष की चारों दिशाओं में और भी छोटे-छोटे कक्ष थे अगर आपको मंदिर के प्रांगण की कल्पना करनी है तो आपकी स्क्रीन पर एक मैप आ रहा होगा।

       इस मैप की हम चर्चा आगे भी करेंगे कि किसने और कब इस मैप को बनाया लेकिन अभी आपकी हेल्प के लिए इस मैप को हम आपको दिखा दे रहे हैं अब साथियों इसमें एएसआई की टीम हमें ये बताती है कि जो तीन कक्ष हैं नॉर्थ साउथ और वेस्ट के वो तो अभी भी एजिस्ट करते हैं लेकिन जो ईस्ट का कक्ष है उस पर फ्लोरिंग कर दी गई है जिसकी वजह से अब बिना एक्सक वेशन के उस कक्ष का एक्सेस हमें नहीं मिल पाएगा अब दोस्तों अगर हम अगले बिंदु पर बढ़े नवे बिंदु पर तो वहां पर एएसआई ने यह बताया है कि मंदिर का जो मध्य कक्ष था जहां पर यह मध्य कक्ष बना था उसी जगह पर इस मस्जिद का ज्ञानवापी मस्जिद का सेंट्रल हॉल है और इसमें एएसआई का यह भी कहना है कि जो पुराना स्ट्रक्चर था मंदिर का उसमें जो भी मजबूत दीवारें थी उनको उसी तरह से इस मस्जिद में प्रयोग में लिया गया है साथ में और भी जो कंपोनेंट्स थे वो भी उसी तरह से यूज किए गए हैं बस फर्क इतना है कि जो भी चित्रकारी थी हिंदू धर्म की उसको तोड़ मरोड़ कर मीता करके फ्लोरल चित्र  में बदल दिया गया साथ में 10वें पॉइंट में ये भी बताया गया है कि मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत ही सुंदर था। एक बड़ा द्वार था और उसके बाद एक छोटा द्वार था और उन पर बहुत सुंदर चित्रकारयां थी लेकिन जब मुस्लिम आक्रांताऔ ने उन्हें तोड़ा तो सब कुछ ध्वस्त कर दिया अब साथियों हमने भूमि के ऊपर की बातें कर ली भूमि के अंदर भी बहुत ढेर सारे राज दबे हुए हैं चलिए आइए उनके बारे में भी जानते हैं


ज्ञानवापी मस्जिद के भूमिगत कक्षों का रहस्य खुला !!

 दोस्तों अगर आप इस रिपोर्ट के 29 वें पॉइंट को देखेंगे तो यहां पर बताया गया है कि मस्जिद में बहुत ढेर सारे भूमिगत कक्ष मिले हैं ये भूमि के अंदर है और साथ में एक मस्जिद के सामने बड़ा सा प्लेटफार्म भी मिला है इनके बनाने के पीछे का उद्देश्य यही था कि ज्यादा से ज्यादा लोग मस्जिद का प्रयोग कर सकें अब इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि जो यह प्लेटफार्म बनाया गया यह पूर्व दिशा में ही बनाया गया था और मैंने बताया था कि जो पूर्व का कक्ष है है वो अभी इन- एक्सेसिबल है तो इसका कारण यही है क्योंकि पूर्व दिशा में प्लेटफार्म बना दिया गया अब इसके साथ-साथ जो भूमिगत कक्ष मिले हैं जो बेसमेंट मिले हैं उनके अंदर से भी बहुत महत्त्वपूर्ण वस्तुएं हमें प्राप्त हुई हैं रिपोर्ट के 22वें बिंदु में बताया गया है कि जो ये बेसमेंट है ये जिस स्तंभ पर खड़े हैं वो स्तंभ पूर्णतया हिंदू स्तंभ हैं और इन स्तंभों पर घंटियों की आकृति देख सकते हैं और स्तंभ के नीचे दिया रखने के लिए भी आकृतियां बनाई गई हैं तो आप समझ सकते हैं कि इस्लाम में घंटियों का उपयोग वर्जित है। वो तो हलाल है। तो ये किस प्रकार से यह स्तंभ वहां पर मौजूद है और साथ में अगले पॉइंट में यह भी बताया गया है कि एक ऐसा कक्ष भी मिला है जहां पर बहुत ढेर सारे हिंदू ईश्वर की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं साथ में प्रांगण के कई जगह पर त्रिशूल और स्वास्तिक की आकृतियां भी उकेरी हुई मिली हैं साथियों हमें तो किसी रिपोर्ट की भी जरूरत नहीं थी लेकिन मेरा यह था कि आपको पहले ये रिपोर्ट समझा दी जाए। इस रिपोर्ट के अलावा भी पहले से बहुत ढेर सारे साक्ष्य हैं जैसा कि हमने आपको जो मानचित्र दिखाया था उस मानचित्र पर भी चर्चा कर लेते हैं कि व मानचित्र इतना महत्वपूर्ण क्यों है?


ज्ञानवापी मानचित्र से क्या पता चला?

 साथियों इंडियन नूमिसमेटिक्स और एपीग्राफी के जो फादर कहे जाते हैं मिस्टर जेम्स प्रिंसेप उन्होंने 1823 में एक मैप बनाया था जिसके माध्यम से उन्होंने बताया था कि विश्वेश्वर मंदिर जहां पर आज ये ज्ञानवापी मस्जिद है वो कितना विशाल था इस मैप में जो डॉटेड लाइंस आपको दिख रही हैं वो डॉटेड लाइंस ये बता रही हैं कि औरंगजेब ने इस पार्ट को तोड़ा था और उस पर मस्जिद का निर्माण किया था तो हम इस मैप में देख सकते हैं कि किस प्रकार विश्वेश्वर महादेव मंदिर के मध्य कक्ष के साथ-साथ पूर्व और पश्चिम के कक्षों को तोड़ा गया था मस्जिद निर्माण के लिए अब दोस्तों यहां पर कुछ लोग ये भी प्रश्न उठाते हैं कि ये मंदिर इतना ही विशाल और प्राचीन था तो इसका वर्णन किसी ग्रंथ में क्यों नहीं मिलता और इस पर भी हमने रिसर्च की है और जानने का प्रयास किया है कि हमारे हिंदू ग्रंथों में विश्वेश्वर महादेव मंदिर के विषय में क्या-क्या जानकारियां मिलती हैं ?


पुराणों में विश्वेश्वर मंदिर और ज्ञानवापी

साथियों जिस प्रकार से श्री राम मंदिर के साक्ष्ययों को ढूंढने में स्कंद पुराण ने एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी वहीं जब हम ज्ञानवापी की बात करते हैं तो वहां पर जो प्राचीन मंदिर था विश्वेश्वर महादेव मंदिर उसकी स्थिति के लिए भी स्कंद पुराण में कई साक्ष्य मिलते हैं अगर आप स्कंद पुराण के काशी महात्म के 26 वें अध्याय के 130 वें श्लोक को देखेंगे तो वहां पर हमें काशी के विश्वेश्वर महादेव जी के मंदिर के बारे में पता चलता है और अगर आप इसी खंड के 33 वें और 34 वें अध्याय में जाएंगे तो आपको ज्ञानवापी के विषय में भी बताया गया है

 वहां पर लिखा है कि काशी में स्वयं शिव जी ने इस कुएं को खोदा था जिसे ज्ञानवापी कहा गया ज्ञानवापी का मतलब हो गया कि ज्ञान का कुआं और यहां पर जो भी तीर्थ यात्री आते थे वो सबसे पहले संकल्प लेते हुए इस कुवे का पानी पीते थे तथा देखे तो स्कंद पुराण के काशी महात्म का जो 34 वां अध्याय है उसका नाम ही ज्ञानवापी प्रशांसनम है। जहां पर 127 श्लोकों में ज्ञानवापी की प्रशंसा की गई है तो साथियों ये हम हिंदुओं की ही सहिसुणता है कि हम इसको कोर्ट में ले जाते हैं हम इस पर साक्ष्यों पर बात करते हैं रिपोर्ट्स बनती हैं ऐतिहासिक साक्ष्य बटोरे जाते हैं इस पर हमारे जैसे लोग लेख  बनाते हैं तब जाक हमारी बात मानी जाती है और वो मंदिर हमें वापस मिलता है और उस पर भी पूरे विश्व का हमें हेट घृणा और दूसरी कम्युनिटीज से हमें गालियां पड़ती हैं जैसे कि कहा जाता है कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती लेकिन अब वह कहावत पुरानी हो गई है प्रत्यक्ष दिख रहा है कि मंदिर है लेकिन वहां पर भी हमें प्रमाणों को देना पड़ रहा है तो दोस्तों मैं आशा करता हूं कि इस ब्लॉग के माध्यम से आप और भी चीजें डिटेल में समझ गए होंगे कि जो रिपोर्ट अभी पब्लिक डोमेन में आई है उसमें क्या-क्या है और उसके अलावा भी ज्ञानवापी का इतिहास कैसा रहा है साथियों इस लेख को अपने दोस्तों में परिवारजनों में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस बात की सच्चाई के बारे में पता चले।

 जय श्रीराम

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