जलहरी (जलधारी) उत्तर दिशा की ओर क्यों होती है ?

कैलाश उत्तर में है: भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत उत्तर दिशा में माना गया है। इसलिए उनके आराध्य रूप शिवलिंग की जलहरी का मुख उत्तर की ओर रखा जाता है।

उत्तर दिशा सात्विक है: उत्तर दिशा को सात्विक, सकारात्मक और शुभ माना गया है। यह धार्मिकता और अध्यात्म की ओर प्रेरित करती है। आध्यात्मिक साधना, ध्यान और योग-साधना में उत्तर की ओर मुख करने का विधान है, इसी भावना से जलहरी उत्तर की ओर रखी जाती है।

हिमालय की दिशा: कैलाश हिमालय में स्थित है और हिमालय उत्तर में है। शिव के निवास की दिशा की ओर जलहरी करने की यही परंपरा है।

जल-निकास का विधान: शिवलिंग पर चढ़ा जल जलहरी के मुख (सोमसूत्र) से बाहर बहता है, और परंपरा में इसे लाँघा नहीं जाता। इसलिए जलहरी का मुख उत्तर में रखकर भक्त पूर्व या पश्चिम की ओर से दर्शन और परिक्रमा करते हैं।

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