मानव शरीर में मस्तिष्क से लेकर चरण तक राशि स्वरूप - मानव शरीर में राशि।

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श्रीगणेशाय नमः

     मानव शरीर में मस्तिष्क से लेकर पैर तक सभी 12 राशियाँ समाहित हैं तथा इस पर किसी ग्रह की दृष्टि पढ़ने से यह प्रभावित भी रहती है, जिसके कारण वह अंग में समस्याएं आ सकती हैं। इस रहस्यमय और अनूठे संबंध को समझने के लिए, हम इस अद्वितीय राशि-स्वरूप की गहन अन्वेषण को देखेंगे, जो मानव स्वास्थ्य और तंत्रिका संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


यह श्लोक क्रमशः 'बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्' के "राशिप्रभेदाध्यायः" में श्लोक 4 से लेकर २४ तक के  हैं। इस पुस्तक के लेखक ऋषि पराशर जी हैं।


 शीर्षाननौ तथा बाहू हत्क्रोडकटिवस्तयः ।

 गुह्योरुजानुयुग्मे वै युगलें जङ्घके तथा ।।४।।


अर्थात:- जन्मलग्न से उक्त बारह राशियाँ क्रम से शिर, मुख, दोनों भुजायें, हृदस, पेट, कटि, बस्ति (नाभिलिंग के मध्यभाग को बस्ति कहते हैं), गुह्यस्थान (स्त्री-पुरुष के चिह्न), उरु, दोनों जानु, जंघे हैं।।४।।


चरणौ द्वौ तथा लग्नात् ज्ञेयाः शीर्षादयः क्रमात् ।

चरस्थिरद्विस्वभावाः क्रूराक्रूरौ नरस्त्रियौ ।।५।।


अर्थात:- दोनों चरण कालपुरुष के अंग में हैं। मेषादि राशियों की क्रम से चर, स्थिर, द्विस्वभाव तथा क्रूर, शुभ और पुरुष स्त्री संज्ञायें हैं।।५।।

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Mesh Rashi(Aries)-मेष राशि

पूर्ववासी नृपज्ञातिः शैलचारी रजोगुणी। पृष्ठोदयी पावकी च मेषराशिः कुजाधिपः।।७।।

मेष राशि का शरीर विशाल और लाल रंग का होता है।  यह रात्रि में शक्तिशाली है क्योंकि यह चतुष्पाद राशि है। यह पूर्व की ओर है और साहस का प्रतीक है। यह राजा से जुड़ा हुआ है। यह पहाड़ों पर घूमने वाली राशि है। यह पृष्ठोदय राशि है, जिसका स्वामी मंगल है।।


Vrishabh Rashi(Taurus)-वृषभ राशि

श्वेतः शुक्राधिपो दीर्घः चतुष्पाच्छर्वरी बली ।याम्येट् ग्राम्यो वणिग्भूमिः स्त्री पृष्ठोदयो वृषः ।।८।।

वृषभ राशि श्वेत वर्ण है और शुक्र देव इसके स्वामी हैं। यह लम्बे शरीर वाली और चतुष्पाद राशि है। यह रात्रि बली है और दक्षिण इसकी दिशा है। यह ग्राम वासियों और वैश्य वर्ण (व्यापारी वर्ग) को दर्शाती है। यह पृथ्वी तत्व राशि और पृष्ठोदय है।


Mithun Rashi(Gemini)-मिथुन राशि

शीर्षोदयी नृमिथुनं सगदं च सवीणकम्। प्रत्यक्स्वामी द्विपाद्रात्रिबली ग्राम्याग्रगोऽनिली ।।९।। समगात्रो हरिद्वर्णो मिथुनाख्यो बुधाधिपः ।

मिथुन राशि, जो शीर्षोदय राशि है, अपनी विशेषता में पुरुष और स्त्री को अनूठा अनुभव प्रदान करती है। इसका पुरुष रूप गदा से और स्त्री रूप वीणा से प्रतिष्ठित है। यह पश्चिम दिशा में स्थित है और वायु तत्व से संबंधित है, जिससे इसका विशेष प्रभाव होता है। एक द्विपाद राशि के रूप में, इसकी रात्रि बलि और ग्रामवासी स्वभाव से निर्दिष्ट हैं। इसकी आभा हरे रंग की, समान शरीर और घास की सुरत में व्यक्त होती है। इसका स्वामी बुध देवता है, जिससे इसकी विद्या और बुद्धिमत्ता की प्रतीति होती है। 


Kark Rashi(Cancer)-कर्क राशि

पाटलो वनचारी च ब्राह्मणो निशि वीर्यवान् ।।१०।। बहुपटुतरः स्थौल्यतनुः सत्त्वगुणी बली । पृष्ठोदयी कर्कराशिर्मृगाङ्कोऽधिपतिः स्मृतः ।।११।।

कर्क राशि का वर्ण पाटल लाल-श्वेत मिश्रित, जो वन्य में विचरण करने वाली और ब्राह्मण वर्ण की है, रात्रि बली होती है। इस राशि का शरीर बहुपाद और स्थूल है, जो सत्व गुण प्रधान है और जल तत्व से संबंधित है। यह पृष्ठोदय राशि है, और इसके स्वामी चंद्र देव हैं, जिनसे इस पर चंदनी और मन का प्रभाव होता है।


Singh Rashi(Leo)-सिंह राशि

सिंहः सूर्याधिपः सत्त्वी चतुष्पात्क्षत्रियो बली । शीर्षोदयी बृहद्गाोत्रः पाण्डुः पूर्वेद्युवीर्यवान् ।।१२।।

सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं और यह एक सात्विक राशि है। इसका स्वरूप चतुष्पाद और क्षत्रिय है, जो वन को दर्शाता है और शीर्षोदय है। इसका शरीर लम्बा होता है और यह पाण्डु वर्ण (भूरा) की रूपरेखा से निर्मित होता है। सिंह राशि पूर्व दिशा में निवास करती है और दिवा बली होती है, जिससे इसका प्रभाव शक्तिशाली और प्रकाशमय होता है।


Kanya Rashi(Virgo)-कन्या राशि

पार्वतीयाथ कन्याख्या राशिर्दिनबलान्विता ।  शीर्षोदया च मध्याङ्गा द्विपाद्याम्यचरा स्मृता । ।१३।। ससस्यदहना वैश्या चित्रवर्णा प्रभञ्जिनी। कुमारी तमसायुक्ता बालभावा बुधाधिपः ।।१४।।

कन्या राशि, जो पर्वतीय क्षेत्र में रुचि वाली और दिवा बली है, वह एक शीर्षोदय, मध्यम शरीर और द्विपाद राशि है। इसका निवास दक्षिण दिशा में है और इसके एक हाथ में अनाज और दूसरे हाथ में अनाज है। यह वैश्य वर्ण और बहुरंगी है, जिससे इसकी समृद्धि का सूचना होती है। कन्या राशि तूफान को दर्शाती है, और यह कुंवारेपन का प्रतीक है और तामसिक गुण से युक्त है। इसके स्वामी बुध देव हैं, जिनसे इसकी विद्या और बुद्धिमत्ता की प्रतीति होती है। 


Tula Rashi(Libra)-तुला राशि

शीर्षोदयी द्युवीर्याढ्यस्तथा शूद्रो रजोगुणी । शुक्रोऽधिपो पश्चिमेशो तुलो मध्यतनुद्विपात् । ।१५।।

तुला राशि, जो शीर्षोदय है और दिवाबली है, इसका रंग कृष्ण है और यह रजोगुणी है। यह एक शूद्र वर्ण की राशि है, जिसकी दिशा पश्चिम है और भूमि को दर्शाती है। तुला राशि मध्यम शरीर वाली और द्विपाद राशि है। इसके स्वामी शुक्र देव हैं, जिनसे इसकी सौंदर्य और समर्पणशीलता की प्रकाशित होती है।


Vrishchik Rashi(Scorpio)-वृश्चिक राशि

शीर्षोदयोऽथ स्वल्पाङ्गो बहुपाद्ब्राह्मणो बली ।सौम्यस्थो दिनवीर्याठ्यः पिशङ्गो जलभूचरः । रोमस्वाढ्यो ऽतितीक्ष्णा‌ङ्गो वृश्चिकश्च कुजाधिपः । ।१६।।

वृश्चिक राशि, जो शीर्षोदय है, छोटे शरीर वाली, बहुपाद, ब्राह्मण वर्ण, और छिद्र में निवास करने वाली है, इसकी दिशा उत्तर है और यह दिवाबली है। इसका रंग लाल-भूरा है और पानी युक्त भूमि पर निवास करती है। वृश्चिक राशि रोम से युक्त शरीर और तीखे अंगों की विशेषता से युक्त है। इसके स्वामी मंगल देव हैं, जिनसे इसकी ऊर्जा और संजीवनी शक्ति की प्रकाशित होती है।


Dhanu Rashi(Sagittarius)-धनु राशि

अश्वजङ्घो त्वथ धनुर्गुरू स्वामी च सात्त्विकः ।।१७ ।।पि‌ङ्गलो निशि वीर्यान्यः पावकः क्षत्रियो द्विपाद् । आदावन्ते चतुष्याद् समगात्रो धनुर्धरः ।।१८।।

धनु राशि, जिसमें घोड़े की जंघा की विशेषता है और जो सात्विक गुण से युक्त है, इसके स्वामी बृहस्पति देव हैं। यह पिंगल वर्ण, रात्रि बली, अग्नि तत्व, और क्षत्रिय वर्ण की राशि है। धनु राशि पूर्वार्ध में द्विपद और उत्तरार्ध में चतुष्पद होती है। इसका शरीर समान होता है और हाथ में धनुष धारण किया जाता है। यह पूर्व दिशा में और भूमि पर निवास करती है, इससे इसका तेजस्वी और पृष्ठोदय स्वभाव होता है।


Makar Rashi(Capricon)-मकर राशि

मन्दाधिपस्तमी भौमी याम्येट् च निशिं वीर्यवान् ।।१९ ।। पृष्ठोदयी बृहद्गात्रः मकरो जलभूचरः। आदौ चतुष्पादन्ते च द्विपदो जलगो मतः ।।२०।।

मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं और यह तमोगुण से युक्त है। इसका तत्व भूमि है और यह दक्षिण दिशा को दर्शाती है। यह रात्रि बली है और पृष्ठोदय है। इसका शरीर विशाल है और वन और भूमि पर निवास करता है। मकर राशि पूर्वार्ध में चतुष्पाद है और उत्तरार्ध में द्विपाद है, जल तत्व से संबंधित है और इसे एक संतुलित और संवेदनशील राशि बनाता है।


Kumbh Rashi(Aquarius)-कुम्भ राशि

कुम्भः कुम्भी नरो बभ्रुः वर्णमध्यतनुद्विपात् । द्युवीर्यो जलमध्यस्थो वातशीर्षोदयी तमः ।।२१।। शूद्रः पश्चिमदेशस्य स्वामी दैवाकरिः स्मृतः ।

कुम्भ राशि, जिसमें हाथ में घड़ा लिए हुए पुरुष की विशेषता है, वह नेवले के समान भूरे रंग की है, मध्यम शरीर और द्विपद है, दिवाबली है, जल में निवास करती है, वायु प्रकृति है, शीर्षोदय है और तमोगुण से युक्त है। यह शूद्रवर्ण है और पश्चिम दिशा में निवास करती है। कुम्भ राशि का स्वामी शनि देव है, जिससे इसकी ऊर्जा और आत्म-निग्रह की प्रकाशित होती है।


Meen Rashi(Pisces)-मीन राशि

मीनौ पुच्छास्य संलग्नौ मीनराशिर्दिवाबली ।।२२।। जली सत्त्वगुणाढ्यश्च स्वस्थो जलचरो द्विजः । अपदो मध्यदेही च सौम्यस्थो ह्युभयोदयी ।। २३ ।।

मीन राशि, जो दो मछलियों को दर्शाती है जिनका मुख दूसरे की पुंछ की तरफ है, वह रात्रि बली है। यह जल तत्व और सत्व गुण से युक्त है। यह ब्राह्मण वर्ण, चरण हीन, मध्यम शरीर वाली है, उत्तर दिशा की स्वामी है और उभयोदय है। मीन राशि के स्वामी गुरू देव हैं, जिससे इसकी ज्ञान और संवेदनशीलता की प्रकाशित होती है।

🔴📌इन सभी का निरूपण इस चार्ट में दर्शाया गया है।

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FAQ

प्रश्न:-"क्या आपको पता है कि राशि स्त्री है या पुरुष कैसे पता लगाते हैं?"

उत्तर:- आप इस श्लोक (4) को ध्यान से पढ़ें अथवा नीचे दी गई तालिका पर जाएं।

राशियों की कितनी प्रजातियाँ होती हैं?

राशियों को तीन प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है: स्थिर राशियाँ, चर राशियाँ, और द्वि स्वभाव राशियाँ।

स्थिर राशियों में कौन-कौन सी होती हैं?

स्थिर राशियों में वृषभ, सिह, वृश्चिक, कुम्भ शामिल हैं।

चर राशियों कौन-कौन सी हैं?

चर राशियों में मेष, कर्क, तुला, मकर शामिल हैं।

द्वि स्वभाव राशियों में कौन-कौन सी हैं?

द्वि स्वभाव राशियों में मिथुन, कन्या, धनु, मीन शामिल हैं।

राशियों के प्रकारों में अंतर क्या है?

स्थिर राशियाँ स्थिर और दृढ़ होती हैं, चर राशियाँ चंचल और परिवर्तनशील होती हैं, और द्वि स्वभाव राशियाँ उदार और सहज होती हैं।

कृपया विशिष्ट राशियों के विवरण प्रदान करें।

हर राशि का विवरण इस प्रकार है: तुला राशि | मीन राशि | मकर राशि | [और आगे...]

वेदिक ज्योतिष में राशियों का महत्व क्या है?

वेदिक ज्योतिष में राशियों का महत्व भविष्यवाणी और व्यक्ति की व्यक्तिगतिता को समझने में मदद करता है।

क्या है वेदिक ज्योतिष में ग्रहों का रोल?

ग्रह जन्मकुंडली में विशेष स्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं।

वेदिक ज्योतिष में राशियों के स्वामी कौन होते हैं?

प्रत्येक राशि का स्वामी एक ग्रह होता है, जो उस राशि पर प्रभाव डालता है। जैसे कि, मकर राशि का स्वामी शनि देव है।

वेदिक ज्योतिष में राशिफल कैसे निकाला जाता है?

राशिफल निकालने के लिए जन्मकुंडली के ग्रहों की स्थितियों का विश्लेषण किया जाता है और इसके आधार पर पूर्वाग्रहों का परिणाम दिखाया जाता है।


इन्हें भी देखें।:-



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